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अहिंष्य.... इक बूँद!

 आज मैंने एक लाचार बाप, और एक मजबूर माँ को देखा, आज मैं देख पाया, इस कुत्सित सामाजिक दुष्चक्र को, जो एक पिता को इतना मजबूर कर जाता है, कि वो हो जाता है, अत्यधिक मजबूर! राजा होकर मजबूर, खुद की बनायी सल्तनत से बहुत दूर! हे दुनिया को बेटियों  कभी भी अपने बाप का दामन न छोड़ना, इक ज्योति जिसको जलाकर वो इस क्रूरतम दुनिया में तूम्हे नाजों से पालकर एक नन्ही राजकुमारी बनाकर आने की अनुमति देता है!! तुम सीता बनो, वो तुम्हें राम वरेंगे! अरे विश्वास तो करो जनक पर! अरे विश्वास तो करो जनक पर!!

बोधिसत्व!

सनातन परंपरा में एक समय पुरोहितों का अत्याचार आत्यंतिक हो गया था तब इस अत्याचार के विरुद्ध एक सम्यक आवाज बड़े ही मधुर शैली में महात्मा बुद्ध ने लोगों तक पहुंचाने की शुरुवात की! जो धीरे-धीरे बौद्ध धर्म का रूप लिया, आज अनुमानित रूप से पूरे विश्व मे इसाई और इस्लाम के क्रमिक तीसरे स्थान पर बौद्ध मत को मानने वाले लोग दुनिया के चारों ओर बसे हुए हैं एवं बड़े सुख एवं समृद्धशाली परम्पराओं का निर्वहन कर रहे हैं। इसी बौद्ध दर्शन के क्रम में एक बहुत ही प्यारा शब्द है 'बोधिसत्व' जिसके विषय मे सूक्ष्म विश्लेषण मैं आगे की पंक्तियों में करूँगा! मेरा दृढ़ विश्वास है कि मैं इस विश्लेषण से दुनिया के समस्त धर्मों में ऐक्य स्थापित कर सकता हूँ! जारी रहेगा....